Wednesday, February 25, 2009

होली

सात जनम तक भी ना छुटेगा याद रहेगा सारी उमर।
प्रेम रंग में रंग डालेंगे दिलवर तेरे दिल की चुनर।।

कंचन काया पिचकारी की बौछारों से तर होगी।
लाल गुलाल की लाली निराली गोरे गालों पर होगी।।
रंग बिरंगी कर देंगे प्रियतम हम तोरी पतरी कमर ।।।

भागोगे जो दूर तुम हमसे छम छम पायल खनकेगी ।
भीगे अम्बर के अन्दर से देह दामिनी दमकेगी।।
इन्हें रोकने को ज्यों रुकोगे दामन में लेगें तभी भर।।

खुल कर खेलो होली प्रिये संग मन में उमडा भाव अनंग।
नाचो गाओ रंग लाओ अंग अंग उमड़ी उमंग।।
’दीप‘ नेह के प्यासे है हम छोड़ेंगे न कोई कसर।।

4 comments:

  1. धवल चाँदनी सी चूनर को, धानी रंग दो होली में।
    तोड़ न देना प्रेम-प्रीत को, केवल हँसी ठिठोली में।।

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  2. धवल चाँदनी सी चूनर को, धानी रंग दो होली में।
    तोड़ न देना प्रेम-प्रीत को, केवल हँसी ठिठोली में।।

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  3. बहुत बढ़िया रचना है।बधाई।

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